मुस्तफा जाने रहमत पे लाखो सलाम
शम ए बज्मे हिदायत पे लाखो सलाम
शहर ए यार ए इरम, ताज दार ए हरम
नोवा हार ए शफा’अत पे लाखों सलाम
हम यहाँ से पुकारे, वहां वो सुने
मुस्तफा कि शमा’अत पे लाखों सलाम
ढाल डी क़ल्ब पे अजमत ए मुस्तफा
सय्य्दी आला हजरत पे लाखों सलाम
मुझ से खिदमत कि कुद्शी कहे हाँ रजा
मुस्तफा जाने रहमत पे लाखों सलाम
