सुनते हैं कि महशर में सिर्फ़ उन की रसाई है एक मशहूर और बेहद प्यारा नातिया कलाम है, जिसमें हुज़ूर-ए-अक़दस ﷺ की शफ़ाअत और महशर के दिन उनकी ख़ास रहमत की उम्मीद का इज़हार किया गया है।
यह खूबसूरत कलाम आला हज़रत इमाम अहमद रज़ा ख़ान रहमतुल्लाहि अलैह का लिखा हुआ है। कलाम-ए-आला हज़रत को पढ़ने और सुनने से दिल में एक अलग तरह की लज़्ज़त और मोहब्बत का एहसास पैदा होता है।
आप इस कलाम को यहाँ हिंदी और Roman English Lyrics में पढ़ सकते हैं। ऐसी ही खूबसूरत नातें और कलाम पढ़ने के लिए Islamic Naat Lyrics से जुड़े रहें।
सुनते हैं कि महशर में सिर्फ़ उन की रसाई है – Naat Lyrics
सुनते हैं कि महशर में सिर्फ़ उन की रसाई है
गर उन की रसाई है, लो जब तो बन आई है
मचला है कि रहमत ने उम्मीद बँधाई है
क्या बात तेरी, मुजरिम! क्या बात बनाई है
सब ने सफ़-ए-महशर में ललकार दिया हम को
ऐ बेकसों के आका! अब तेरी दुहाई है
यूँ तो सब उन्हीं का है, पर दिल की अगर पूछो
ये टूटे हुए दिल ही ख़ास उन की कमाई है
बाज़ार-ए-अमल में तो सौदा न बना अपना
सरकार! करम तुझ में ऐबी की समाई है
ऐ दिल! ये सुलगना क्या, जलना है तो जल भी उठ
दम घुटने लगा, ज़ालिम! क्या धूनी रमाई है
मुजरिम को न शर्माओ, अहबाब! कफ़न ढक दो
मुँह देख के क्या होगा, पर्दे में भलाई है
अब आप ही सँभालें तो काम अपने सँभल जाएँ
हम ने तो कमाई सब खेलों में गँवाई है
ऐ इश्क़! तेरे सदक़े जलने से छुटे सस्ते
जो आग बुझा देगी, वो आग लगाई है
तयबा न सही अफ़ज़ल, मक्का ही बड़ा, ज़ाहिद!
हम इश्क़ के बंदे हैं, क्यूँ बात बढ़ाई है
मतला में ये शक क्या था, वल्लाह रज़ा! वल्लाह
सिर्फ़ उन की रसाई है, सिर्फ़ उन की रसाई है
शायर: इमाम अहमद रज़ा ख़ान
Sunte Hain Ki Mahshar Mein Sirf Unki Rasai Hai – Roman English Lyrics
Sunte Hain Ki Mahshar Mein Sirf Unki Rasai Hai
Gar Unki Rasai Hai, Lo Jab To Ban Aayi Hai
Machla Hai Ki Rahmat Ne Ummeed Bandhai Hai
Kya Baat Teri, Mujrim! Kya Baat Banayi Hai
Sab Ne Saf-e-Mahshar Mein Lalkar Diya Hum Ko
Ae Bekason Ke Aaqa! Ab Teri Duhai Hai
Yun To Sab Unhi Ka Hai, Par Dil Ki Agar Poochho
Ye Toote Hue Dil Hi Khaas Unki Kamaai Hai
Bazaar-e-Amal Mein To Sauda Na Bana Apna
Sarkar! Karam Tujh Mein Aibi Ki Samaai Hai
Ae Dil! Ye Sulagna Kya, Jalna Hai To Jal Bhi Uth
Dam Ghutne Laga, Zalim! Kya Dhooni Ramai Hai
Mujrim Ko Na Sharmao, Ahbaab! Kafan Dhhak Do
Munh Dekh Ke Kya Hoga, Parde Mein Bhalai Hai
Ab Aap Hi Sambhalen To Kaam Apne Sambhal Jaayen
Hum Ne To Kamaai Sab Khelon Mein Gawaai Hai
Ae Ishq! Tere Sadqe Jalne Se Chhute Saste
Jo Aag Bujha Degi, Wo Aag Lagai Hai
Taiba Na Sahi Afzal, Makkah Hi Bada, Zaahid!
Hum Ishq Ke Bande Hain, Kyun Baat Badhai Hai
Matla’ Mein Ye Shak Kya Tha, Wallah Raza! Wallah
Sirf Unki Rasai Hai, Sirf Unki Rasai Hai
Shayar: Imam Ahmad Raza Khan
Naat Information
Naat Name: सुनते हैं कि महशर में सिर्फ़ उन की रसाई है / Sunte Hain Ki Mahshar Mein Sirf Unki Rasai Hai Lyrics
Poet / Shayar: Imam Ahmad Raza Khan
Naat Khawan: Hassan Ullah Hussaini
Language: Hindi / Roman English
Category: Naat / Madina Naat / Hajj Kalam
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